स्वयं सहायता समूह से 50 हजार रुपये का ऋण लेकर सरस्वती देवी ने मशरूम की खेती शुरू की। मेहनत और लगन से अब वह सालाना डेढ़ लाख रुपये से अधिक की कमाई कर रही हैं और गांव की अन्य महिलाओं को भी स्वरोजगार के लिए प्रेरित कर रही हैं।
स्वयं सहायता समूह से 50 हजार रुपये का ऋण लेकर सरस्वती देवी ने मशरूम की खेती शुरू की। मेहनत और लगन से अब वह सालाना डेढ़ लाख रुपये से अधिक की कमाई कर रही हैं और गांव की अन्य महिलाओं को भी स्वरोजगार के लिए प्रेरित कर रही हैं।
आजादी के 80 साल बीत गए, गांवों की तस्वीर बदलने के दावे हुए, लेकिन नेबुआ नौरंगिया विकासखंड के सिरसिया कला ग्रामसभा स्थित हर्दी छपरा टोले के लोगों की जिंदगी आज भी सड़क के इंतजार में अटकी है
स्वयं सहायता समूह से 50 हजार रुपये का ऋण लेकर सरस्वती देवी ने मशरूम की खेती शुरू की। मेहनत और लगन से अब वह सालाना डेढ़ लाख रुपये से अधिक की कमाई कर रही हैं और गांव की अन्य महिलाओं को भी स्वरोजगार के लिए प्रेरित कर रही हैं।
स्वयं सहायता समूह से 50 हजार रुपये का ऋण लेकर सरस्वती देवी ने मशरूम की खेती शुरू की। मेहनत और लगन से अब वह सालाना डेढ़ लाख रुपये से अधिक की कमाई कर रही हैं और गांव की अन्य महिलाओं को भी स्वरोजगार के लिए प्रेरित कर रही हैं।