HomeUttar Pradeshड्रेनों में चिलवन से जलनिकासी बाधित, हजारों एकड़ फसल जलमग्न

ड्रेनों में चिलवन से जलनिकासी बाधित, हजारों एकड़ फसल जलमग्न

ड्रेनों में चिलवन से जलनिकासी बाधित, हजारों एकड़ फसल जलमग्न

पिपरा बाजार,कुशीनगर।विशुनपुरा,कुशीनगर।स्थानीय ब्लॉक क्षेत्र में सिधरिया और सरपतही ड्रेन में मछुआरों की ओर से जगह-जगह चिलवन लगाए जाने से जलनिकासी बाधित हो गई है। इससे बारिश का पानी खेतों में जमा हो रहा है। जलभराव के कारण हजारों एकड़ में लगी धान और गन्ने की फसल पर संकट गहरा गया है।

खेतों में लंबे समय तक पानी भरा रहने से धान की फसल सड़ने लगी है, जबकि गन्ने की फसल गिरने और उसमें रोग लगने की आशंका बढ़ गई है। किसानों ने जिला प्रशासन से चिलवन हटवाकर जलनिकासी व्यवस्था बहाल कराने की मांग की है।

क्षेत्र के किसान आलोक मिश्र, शैलेश तिवारी, अभिषेक तिवारी, ललन चौधरी, टुनटुन चौधरी, अशोक तिवारी, मारकंडेय राय, सुरेश राय और शिवनाथ दूबे आदि का कहना है कि सिधरिया और सरपतही ड्रेन में चिलवन लगाए जाने से पानी का प्राकृतिक बहाव रुक गया है।

किसानों की बढ़ी मुश्किल 

बारिश होने पर पानी ड्रेन से निकलने के बजाय खेतों में जमा हो रहा है। इससे किसानों की महीनों की मेहनत पर पानी फिरने की आशंका है।किसानों के मुताबिक धान और गन्ने की खेती में बीज, खाद, सिंचाई और मजदूरी पर काफी खर्च हुआ है। ऐसे में खेतों से समय रहते पानी नहीं निकला तो फसल खराब होने से उन्हें भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ सकता है। जलभराव की समस्या लगातार बनी रहने से किसानों की चिंता बढ़ती जा रही है।

कोटवा, विशुनपुरा, नौरंगिया, बरगहा, गोईती, विरईठ, श्रीराम चौराहा, पटेरा, नरचोचवा, धर्मपुर, चितहा, खजुरिया, अकबरपुर, बभनौली, दुबौली, सरपतही और बहोरा रामनगर समेत कई गांवों के किसान इस समस्या से परेशान हैं। किसानों ने ड्रेनों की सफाई कराने, चिलवन से उत्पन्न अवरोधों को हटवाने और पानी की निकासी का स्थायी प्रबंध करने की मांग की है।

इस संबंध में विशुनपुरा के खंड विकास अधिकारी अखंड प्रताप ने बताया कि उन्हें मामले की जानकारी नहीं है। जानकारी प्राप्त कर जल्द जलनिकासी की व्यवस्था कराने का प्रयास किया जाएगा

कम्प्यूटर जगत अखबार के लिए प्रिंस विश्वकर्मा का रिपोर्ट..

RELATED ARTICLES
- Advertisment -

Most Popular

- Advertisment -