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वीटीआर जंगल मे Tiger अपना इलाका कायम करने के चक्कर मे बार-बार बदल रहा अपना ठिकाना,वनकर्मी पकड़ने में बहा रहे पसीना 

वीटीआर जंगल मे Tiger अपना इलाका कायम करने के चक्कर मे बार-बार बदल रहा अपना ठिकाना,वनकर्मी पकड़ने में बहा रहे पसीना

बगहा :वीटीआर जंगल मे नव व्यस्क बाघ(Tiger) अपना टेरिटरी ( इलाका ) कायम करने के चक्कर मे बार बार अपना ठिकाना बदल रहा है ।

बाघ जंगल क्षेत्र में रहते हैं कई बार उनका प्रजनन जंगल से सटे क्षेत्र में होता है,और जब बच्चे बड़े होते हैं

तो कुदरती स्वभाव की वजह से नव व्यस्क बाघ अपना इलाका कायम करने के लिए ठिकाने बदलता रहता है।

टेरिटरी कायम करने के लिए बाघ मल मूत्र त्याग कर इलाका बनाता है जिसमे दूसरा बाघ प्रवेश नहीं

कर सकता अगर संयोग से कोई दूसरा बाघ टेरिटरी क्षेत्र में चला आता है तो दोनों में संघर्ष होता है,

यह बात वीटीआर के फील्ड डायरेक्टर नेशामणि के ने कही । बतादें की वाल्मीकि टाइगर रिजर्व का वन क्षेत्र 980 वर्ग

किमी में फैला हुआ,वीटीआर जैव विविधताओं से भरा पूरा वन है।

जिसमे जंगली जीवजंतुओं बाघ,तेंदुआ,जंगली भैंसा समेत हिरण और विभिन्न प्रजातियों के वन जीव पाए जाते हैं।

वाल्मीकि टाइगर रिजर्व घोषित होने के बाद वन क्षेत्र में बाघों की संख्या 28 से बढ़कर 55 से ज्यादा हो गई है

वहीं तेंदुओं की संख्या सैकड़ो में बताई जा रही है। इसके अलावा जंगली

भैंस आपको एक झुंड में 150 से ज्यादा देखने को मिल जाएंगे ।

वन विभाग ने टाइगर्स की संख्या बढ़ाने व उनके संरक्षण को लेकर कई तरह की योजनाएं बनाई हैं।

जिसके तहत विटीआर वनक्षेत्र में ग्रासलैंड को बड़े पैमाने पर विकसित किया जा रहा है

ताकि शाकाहारी वन्य जीवों की संख्या बढ़ सके और बाघों के लिए बेहतर हैबिटेट बन जाए।

बतातें चलें कि वीटीआर परिक्षेत्र में बाघों की संख्या बढ़ने के बाद रिहायशी इलाकों में रहने वाले लोगों पर खतरा बढ़ गया है।

क्योंकि वनक्षेत्र का सीमा खुला हुआ है और जंगल से बिल्कुल सटे हुए खेत और लोगों के घर भी हैं।

ऐसे में जब कोई मादा बाघ या तेंदुआ जंगल किनारे के इलाकों में प्रजनन करता है और उसके बच्चे जन्म लेते हैं

तो वे अपना आशियाना यानी टेरिटरी स्थापित करते हैं जहां वे रह सकें।

नतीजतन जंगल किनारे से ये वन्य जीव कभी कभी रिहायशी इलाकों में भी चले आते हैं और यही वजह है

कि जंगल के आसपास बसे लोगों के लिए परेशानी का सबब बन जाते हैं।

ज्ञात हो की विगत पांच माह में बाघ के हमले में तकरीबन आधा दर्जन लोगों की मौत हो चुकी है।

लेकिन इस बात की कोई पुष्टि नही हो पाई है कि एक ही बाघ ने सभी पर हमला किया है।

वीटीआर फील्ड डायरेक्टर नेशामणि के ने बताया कि फिलहाल जो बाघ है बार बार ठिकाना बदल रहा है

वो सही मायने में अपना टेरिटरी तलाश कर रहा है। उन्होंने बताया कि एक

मादा बाघ ने तीन वर्ष पहले तीन बच्चों को जन्म दिया था और वह वापस जंगल के अंदर चली गई

लेकिन उसके तीनो बच्चे अभी अपना टेरिटरी तलाश रहे हैं। उसी में से फिलहाल

एक बाघ का मूवमेंट इस इलाके में लगातार देखा जा रहा है जिसको कैप्चर करने का प्रयास चल रहा है।

उन्होंने बताया कि सीमावर्ती क्षेत्र में जन्म होने के कारण भोजन की तलाश में ये गन्ना के खेत वगैरह में घुस आते हैं

और चीतल,हिरन,जंगली सुअर या अन्य जीवों का शिकार करते हैं।

इसी बीच यदि कोई इंसान सामने पड़ जाता है तो उसके साथ भी घटना घट जाती है।

इन्होंने आगे बताया कि वन्य जीवों को क्या पता है कि वे अपने विटीआर वन क्षेत्र से बाहर घूम रहे हैं।

उन्होंने बताया कि जरूरी नही है कि अब तक जिन छः लोगों पर बाघ ने अटैक किया है वह एक ही बाघ हो।

दूसरे बाघ भी रास्ता भटककर आ सकते हैं साथ हीं इन बाघों को अभी मैन इटर यानी आदमखोर बाघ कहना जल्दबाजी होगी।

क्योंकि जब तक यह साफ नही हो जाता कि 5 माह के भीतर जिन लोगों पर बाघ ने हमला किया है

वह एक ही बाघ है । बाघ के पगमार्क को फॉलो किया जा रहा है साथ हीं कैमरे से भी उसकी निगरानी हो रही है

कभी वह गन्ने के खेत में छुप रहा है तो कभी जंगल का रुख कर ले रहा है

इसलिए उसे पकड़ने में परेशानी हो रही है। उन्होंने कहा कि जिस बाघ को पकड़ने की कोशिश की जा रही है

यदि वह आदमखोर होता तो अब तक गन्ना के खेत मे से कई वनकर्मियों को अपना शिकार बना चुका होता।

बतादें कि 150 से ज्यादा वनकर्मी बाघ को पकड़ने में पसीना बहा रहे हैं

और दिन रात जंगल या जंगल से सटे इलाक़ों में बिना खाए पीए बाघ को तलाशने में जुटे हैं।

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