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Bums:जिले में ऐसा गांव,जहां होती है बारूद की खेती, खेताें में बिखरे पड़े आलू की जगह बम, पुलिस जब गांव में पहुंची तो देख चाैंक गयी

Bums:जिले में ऐसा गांव,जहां होती है बारूद की खेती, खेताें में बिखरे पड़े आलू की जगह बम, पुलिस जब गांव में पहुंची तो देख चाैंक गयी

Bums: आगरा फिरोजाबाद हाईवे पर एक ऐसा गांव है, जहां खेताें में बारूद की खेती है।

खेताें में आलू की जगह बम बिखरे नजर आते हैं। जब आतिशबाजी के क्षेत्र में बड़े ब्रांड नहीं थे,

तब तो इस गांव में दूर−दूर से लोग पटाखे खरीदने आते थे। देसी अंदाज में बनाने वाले आतिशबाजाें ने तरीके में

बदलाव नहीं किया तो गांव में लापरवाही से धमाके भी होते गए और दर्जनाें लोगाें की जान जा चुकी है।

बहुत से लोग इस पेशे से तौबा कर गए तो अब भी बहुत से परिवार इस काम में लिप्त हैं।

पुलिस जब बुधवार को गांव में पहुंची तो चाैंक गयी। महिलाएं खेताें में बमाें को सुखाते हुए मिलीं।

पुलिस ने यहां आतिशबाजी के चार गोदामाें को सील कर दिया है।

कुछ ही लाइसेंसधारी आतिशबाजी

एत्मादपुर तहसील क्षेत्र के नौ हजार की आबादी वाले गांव धौर्रा और पांच हजार की आबादी वाले

गांव नगला खरगा, देशी पटाखों के लिए आगरा जनपद सहित आसपास के जिलों में काफी मशहूर हैं।

हालांकि अब इन गांवों में नाम मात्र के ही लाइसेंसधारक रह गए हैं।

नगला खरगा में लायक सिंह के गोदाम पर पहुंचे तो वह बंद था। दो सौ मीटर दूर टिनशेड में पटाखे बन रहे थे।

फोटो खींचने पर सहम गए। बोले, साहब पेट पर लात क्यों मारना चाहते हो। हमारा कारोबार ठप हो गया है।

नगला खरगा के दिनेश ने बताया कि वह पटाखे, अनार और रोशनी बनाते हैं।

अब शादियों में भी ब्रांडेड आतिशबाजी चलती है। इसलिए उनको काम नहीं मिलता।

उन्होंने बताया कि वह दीपावली पर ही 10 दिन आतिशबाजी बनाते हैं।

एक पीस पर केवल 50 – 60 पैसे की ही बचत होती है। नगला खरगा में दिनेश कुमार, उदयवीर सिंह व विजयपाल ने

ही इस बार लाइसेंस का नवीनीकरण कराया है। जबकि पिछले वर्ष

दोनों गांवों में नौ लाइसेंस और पुरानी लिस्ट पंद्रह से अधिक की है।l

कई चरण में तैयार होते हैं पटाखे

देसी पटाखे बनाने वाले काम में वे खुद को एक्सपर्ट मानते हैं। पटाखों के लिए रॉ मैटेरियल शहर से लाते हैं।

एक पुराना व्यक्ति पटाखे में विस्फोटक सामग्री भरता है। महिलाएं उसमें

आग जलाने की बत्ती और फिर मैदा के घोल से पटाखे के ऊपर रंगीन पेपर चढ़ा देते हैं।

बाजरा की तरह सूख रहे बम

नगला खरगा में वर्तमान में तीन लाइसेंस धारक पटाखे बनाने का काम करते हैं।

टिनशेड में पटाखे तैयार होने के बाद उन्हें सुखाने को खेत में रखा जाता है।

जिस तरह खेताें में बाजरा या आलू की फसल पड़ी रहती है, उसी तरह इस समय बम सूख रहे हैं।

अब तक हुए हादसे

2003: आतिशबाजी विस्फोट से एत्मादपुर थाना जमीदोंज, एक की मौत।

2003 : दीपावली से पूर्व आतिशबाजी निर्माण में दो की मौत।

2004 में टेंपो में देसी बम ले जाते कुबेरपुर चौराहे पर धमाके में दो लोगों की मौत।

2005: नगला खरगा में खेत में बनी कोठरी में रखी आतिशबाजी में विस्फोट से पांच की मौत।

2009: नगला खरगा में बीडीसी सदस्य।

2009: गीता देवी और उनके पति बनी सिंह की आतिशबाजी विस्फोट से मौत।

2011: नगला खरगा में गांव के बाहर गोदाम में विस्फोट से तीन लोगों की मौत

2014: धौर्रा निवासी शीला देवी की भी घर में आतिशबाजी बनाते समय मौत हो गयी थी।

2015ः भागूपुर चौराहे पर टेंपो में आतिशबाजी से हुए धमाके से तीन सवारियों की मौत।

चार गोदामों को पुलिस ने किया सीज

धौर्रा व नगला खरगा में एडीएम प्रशासन ने उपजिलाधिकारी व प्रशिक्षु सीओ ने भारी पुलिस बल के साथ

बुधवार शाम को पटाखे बना रहे चार लोगों के यहां छापामार कार्यवाही करते हुए

पटाखों को जब्त कर गोदाम सील कर दिया। बुधवार शाम सात बजे

एडीएम प्रशासन अजय कुमार,उपजिलाधिकारी अभय कुमार व प्रशिक्षु सीओ सैयद अरीब

अहमद ने पुलिस फोर्स के साथ दोनों गांवों में छापा मारा। नगला खरगा में लाइसेंसधारक दिनेश कुमार,

विजय पाल व उदयवीर व धौर्रा में नेत्रपाल के गोदाम पर छापा मारा।

सभी का माल जब्त कर गोदामों को सील कर दिया। प्रशिक्षु सीओ सैयद अरीब अहमद ने बताया कि इन चारों ने

लाइसेंस नवीनीकरण के लिए एडीएम सिटी कार्यलय में आवेदन किया था,

जो अभी जांच के दायरे में है। ये लोग अवैध रूप से पटाखे बना रहे थे।

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