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Govardhan Puja 2022:जानिए गोवर्धन पूजा के शुभ मुहूर्त की कुल अवधि 02 घंटे 14 मिनट, पूजा विधि, महत्व और कथा

Govardhan Puja 2022:जानिए गोवर्धन पूजा के शुभ मुहूर्त की कुल अवधि 02 घंटे 14 मिनट, पूजा विधि, महत्व और कथा

Govardhan Puja 2022:दिवाली (Diwali) के अगले दिन गोवर्धन पूजा की जाती है।

इसे देश के कुछ हिस्सों में अन्नकूट के नाम से भी जानते हैं।लेकिन

इस साल सूर्यग्रहण के कारण गोवर्धन पूजा दिवाली के अगले दिन नहीं होगी।

दिवाली 24 अक्टूबर को है, लेकिन गोवर्धन पूजा 26 अक्टूबर को की जाएगी।

गोवर्धन पूजा के दिन भगवान कृष्ण, गोवर्धन पर्वत और गायों की पूजा की जाती है।

गोवर्धन पूजा के दिन 56 या 108 तरह के पकवानों का श्रीकृष्ण को

भोग लगाना शुभ माना जाता है। इन पकवानों को ‘अन्नकूट’ कहते हैं।

गोवर्धन पूजा या अन्नकूट कब मनाते हैं?

गोवर्धन पूजा कार्तिक मास की शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा को मनाई जाती है।

अन्नकूट को दिवाली के ठीक अगले दिन मनाते हैं। लेकिन इस साल सूर्यग्रहण के कारण गोवर्धन पूजा 26 अक्टूबर को

मनाई जाएगी। इसी दिन भाईदूज का भी त्योहार मनाया जाएगा।

गोवर्धन पूजा का शुभ मुहूर्त-

गोवर्धन पूजा प्रातःकाल मुहूर्त – 06:29 ए एम से 08:43 ए एम

अवधि – 02 घंटे 14 मिनट

प्रतिपदा तिथि प्रारम्भ – अक्टूबर 25, 2022 को 04:18 पी एम बजे

प्रतिपदा तिथि समाप्त – अक्टूबर 26, 2022 को 02:42 पी एम बजे

गोवर्धन पूजा की विधि-

गोवर्धन पूजा करने के लिए आप सबसे पहले घर के आंगन में गोबर से गोवर्धन का चित्र बनाएं।

इसके बाद रोली, चावल, खीर, बताशे, जल, दूध, पान, केसर, फूल और दीपक जलाकर गोवर्धन भगवान की पूजा करें।

कहा जाता है कि इस दिन विधि विधान से सच्चे दिल से गोवर्धन

भगवान की पूजा करने से सालभर भगवान श्री कृष्ण की कृपा बनी रहती है।

गोवर्धन पूजा से जुड़ी पौराणिक कथा-

मान्यता यह है कि ब्रजवासियों की रक्षा के लिए भगवान श्रीकृष्ण ने अपनी दिव्य शक्ति से विशाल

गोवर्धन पर्वत को छोटी उंगली में उठाकर हजारों जीव-जतुंओं और इंसानी जिंदगियों को

भगवान इंद्र के कोप से बचाया था। श्रीकृष्‍ण ने इन्‍द्र के घमंड को चूर-चूर कर गोवर्धन पर्वत की पूजा की थी।

इस दिन लोग अपने घरों में गाय के गोबर से गोवर्धन बनाते हैं। कुछ लोग गाय के गोबर से गोवर्धन का पर्वत मनाकर उसे

पूजते हैं तो कुछ गाय के गोबर से गोवर्धन भगवान को जमीन पर बनाते हैं।

 

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