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हाईकोर्ट के आदेश को पालन कराने के लिए 86 बार शिकायत,पांच साल बाद भी नहीं हटा अतिक्रमण,अनशन की चेतावनी

हाईकोर्ट के आदेश को पालन कराने के लिए 86 बार शिकायत,पांच साल बाद भी नहीं हटा अतिक्रमण,अनशन की चेतावनी

रिपोर्ट:-कमलेश यादव

पडरौना, कुशीनगर।विशुनपुरा ब्लॉक के ग्राम सभा नरचोचवा में सरकारी भूमि से अतिक्रमण हटाने के मामले में पांच वर्षों से कार्रवाई नहीं होने पर प्रशासन की कार्यशैली सवालों के घेरे में है। इलाहाबाद हाईकोर्ट के आदेश के बावजूद कब्जा नहीं हटने से आहत 75 वर्षीय याचिकाकर्ता ने मुख्यमंत्री को पत्र भेजकर न्याय की गुहार लगाई है। उन्होंने चेतावनी दी है कि जल्द कार्रवाई नहीं हुई तो वह आमरण अनशन शुरू करेंगे।

गांव निवासी शैलेश तिवारी के अनुसार ग्राम सभा नरचोचवा में खलिहान और चकरोड की सरकारी भूमि पर करीब एक दर्जन लोगों ने कच्चा-पक्का निर्माण कर अवैध कब्जा कर रखा है। सार्वजनिक उपयोग की भूमि को अतिक्रमण मुक्त कराने के लिए उन्होंने वर्ष 2020 में इलाहाबाद हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया था।

न्यायालय ने सरकारी भूमि से अतिक्रमण हटाने का आदेश दिया, लेकिन आरोप है कि स्थानीय प्रशासन ने अब तक आदेश का प्रभावी अनुपालन नहीं कराया।कार्रवाई नहीं होने पर शैलेश तिवारी ने न्यायालय में अवमानना वाद दायर किया।

नोटिस की समय-सीमा समाप्त होने के बावजूद नहीं हटा अतिक्रमण

इसके बाद उच्च न्यायालय की ओर से तीन जिलाधिकारियों को अवमानना नोटिस जारी किए गए। नोटिस की समय-सीमा समाप्त होने के बावजूद अतिक्रमण नहीं हटने से उनकी परेशानी और बढ़ गई है। उनका आरोप है कि जिलाधिकारी, उपजिलाधिकारी और तहसीलदार से लेकर विभिन्न अधिकारियों तक वह 86 बार शिकायत पत्र दे चुके हैं।

कई बार अधिकारियों से मिलकर और रजिस्ट्री के माध्यम से भी गुहार लगाई, लेकिन कार्रवाई अतिक्रमणकारियों से जुर्माना वसूलने तक सीमित रह गई। सरकारी भूमि अब भी कब्जे से मुक्त नहीं हो सकी है।75 वर्षीय शैलेश तिवारी का कहना है कि उम्र अधिक होने और स्वास्थ्य ठीक नहीं रहने के बावजूद उन्हें न्याय के लिए लगातार दौड़ना पड़ रहा है।

न्यायालय के आदेश के बाद भी सुनवाई नहीं होने से वह मानसिक रूप से आहत हैं। उन्होंने मुख्यमंत्री से तत्काल हस्तक्षेप कर सरकारी भूमि खाली कराने और न्यायालय के आदेश का अनुपालन सुनिश्चित कराने की मांग की है। साथ ही चेतावनी दी है कि अनशन के दौरान कोई अप्रिय घटना होती है तो इसकी जिम्मेदारी संबंधित प्रशासनिक अधिकारियों की होगी।

 

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