HomePoliticsPolitics: क्या डिंपल तोड़ पाएंगी मैनपुरी का 71 सालों का ये रिकार्ड? 

Politics: क्या डिंपल तोड़ पाएंगी मैनपुरी का 71 सालों का ये रिकार्ड? 

Politics: क्या डिंपल तोड़ पाएंगी मैनपुरी का 71 सालों का ये रिकार्ड?

Politics: सपा संस्‍थापक मुलायम सिंह यादव के निधन से खाली हुई मैनपुरी लोकसभा सीट पर

5 दिसम्‍बर 2022 को होने वाले उपचुनाव में सपा की उम्‍मीदवार डिंपल यादव के सामने एक मिथक तोड़ने की

चुनौती भी है। यह मिथक है इस सीट से आज तक किसी महिला प्रत्‍याशी के न जीत सकने

का। 1951 में बादशाह गुप्ता ने पहली बार लोकसभा का चुनाव लड़ा और जीतकर दिल्ली पहुंचे।

इसके बाद से अब तक 19 चुनाव हुए और इनमें से एक भी बार कोई महिला प्रत्याशी चुनाव नहीं जीत पाई।

राजनैतिक दलों ने आधी आबादी के वोट बैंक पर फोकस तो किया लेकिन आधी आबादी को दिल्ली तक भेजने में

दिलचस्पी नहीं दिखाई। इस बार सपा ने एक महिला को प्रत्याशी बनाया है तो उनके सामने जीत के साथ-साथ

परिवार की विरासत को बचाने और 71 साल के मिथक को तोड़ने की चुनौती भी है।

मैनपुरी जनपद में इस लोकसभा उपचुनाव के लिए 17 लाख से अधिक मतदाता हैं।

इनमें से 8 लाख से अधिक महिला वोटर हैं। लेकिन आधी आबादी को एक बार भी दिल्ली पहुंचने का मौका नहीं मिला।

ये स्थिति तब है जब सभी राजनैतिक दल महिलाओं की बात करते हैं।

राजनीति (Politics) में उन्हें अलग से आरक्षण देने की वकालत भी होती है।

जहां तक महिलाओं को प्रत्याशी बनाने का सवाल है तो बसपा ने संघमित्रा मौर्य को लोकसभा चुनाव में

प्रत्याशी बनाया था। लेकिन संघमित्रा का सफर मैनपुरी में हार के बाद खत्म हो गया।

ये बात अलग है कि भाजपा ने उन्हें मैनपुरी के बाद बदायूं से जिताकर दिल्ली भेज दिया।

तृप्ति शाक्य भी दिल्ली पहुंचने में नाकाम

भाजपा ने तृप्ति शाक्य को भी 2009 में प्रत्याशी बनाया। लेकिन उन्हें भी हार मिली।

कांग्रेस ने सुमन चौहान को 2004 में टिकट दी। लेकिन सुमन भी दिल्ली नहीं पहुंच पायीं।

इस बार सपा ने 33 साल के अपने चुनावी सफर में पहली बार महिला प्रत्याशी पर दांव खेला है।

सपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव की पत्नी डिंपल यादव पहली बार मैनपुरी से सांसद बनकर दिल्ली पहुंचने के

लिए चुनाव मैदान में हैं। डिंपल हालांकि कन्नौज से जीतकर संसद का सफर तय कर चुकी हैं।

लेकिन मैनपुरी की राजनीति में पहली बार चुनाव मैदान में आयी हैं।

महिलाओं को नहीं मिल सका अब तक मौका

जिले के राजनैतिक जानकार बताते हैं कि मैनपुरी में 1951 में हुए पहले लोकसभा के चुनाव से लेकर

अब तक कभी भी महिलाओं को संसद तक जान का मौका नहीं मिल पाया।

लेकिन इस बार डिंपल को जीत मिली तो महिलाओं के दृष्टिगत

ये मिथक टूटेगा । ये मिथक डिंपल के सामने बड़ी चुनौती है।

RELATED ARTICLES
- Advertisment -

Most Popular

- Advertisment -