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Maternity wards:जंगल छोड़कर गन्ने के खेत बन गए तेंदुओं के मैटरनिटी वार्ड, किसानों के लिए बने खतरा

Maternity wards:जंगल छोड़कर गन्ने के खेत बन गए तेंदुओं के मैटरनिटी वार्ड, किसानों के लिए बने खतरा

maternity wards: कानपुर के जंगल में जन्म देने के बजाय खूंखार तेंदुओं ने अब अपनी नई पीढ़ी के लिए

सुरक्षित ठिकाने के रूप में गन्ने के खेतों को चुना है। गन्ने के खेत इस विडालवंशी जीव के लिए

नए मैटरनिटी वार्ड (maternity wards) बन गए हैं। मादा तेंदुआ अपने गर्भावस्था के आखिरी दिनों में इन्हीं

मैटरनिटी वार्ड (maternity wards) में रहकर शावकों को जन्म दे रही हैं।

इसमें वे लंबे समय तक एकांत में रहकर शावकों की परवरिश भी कर लेती हैं।

कानपुर जू में रह रहे आठ तेंदुए इन्हीं वार्ड की पैदाइश हैं। इन सबका जन्म वेस्ट यूपी में हुआ है।

पशु चिकित्सक डॉ. अनुराग सिंह ने बताया कि गन्ने की फसल नौ से 12 माह में तैयार होती है।

इस दौरान एक-आध बार को छोड़कर लोगों का इन खेतों में आना-जाना नहीं होता है।

ऐसे में मादा तेंदुओं को प्रसव व नवजात शावकों के पालन-पोषण के लिए ये खेत सबसे सुरक्षित महसूस होते हैं।

खासकर नवंबर और दिसंबर गन्ने के खेतों में जाने के लिए सबसे खतरनाक माना जाता है,

क्योंकि यहां रह रहा तेंदुओं का परिवार हमला कर सकता है। खेत मालिक भी काफी सावधानी बरतते हैं।

छिपने के काम आते खेत

घने गन्ने के खेत तेंदुओं के अलावा बाघों के भी पसंदीदा ठिकाना हैं।

जू में कैद आदमखोर बाघ मल्लु और मालती भी इन्हीं खेतों में छिपे थे।

वहां पर उन्होंने 4 किसानों को अपना शिकार बना लिया था। करीब डेढ़ माह से कानपुर में

आतंक का पर्याय बना शातिर तेंदुआ भी एनएसआई के गन्ने के खेतों में छिपा है।

फसल कटी तो मिले नन्हें शावक

चिड़ियाघर के पशुचिकित्सक डॉ. नासिर ने बताया कि 23 अप्रैल 2019 को मुरादाबाद में गन्ने की कटाई में चार नर

शावक मिले थे। तब इनकी उम्र आठ से दस दिन ही थी। इनकी आखें भी नहीं खुली थीं।

कानपुर जू में इनका नाम टॉम, जैक, जैरी और टोनी रखा गया है। इसके 22 दिन बाद 15 मई को बिजनौर में

किसानों को गन्ने की कटाई के दौरान खेत में तीन नर और एक मादा शावक मिले थे।

इन्हें लालू, कालू, महारानी और सूरज नाम दिया गया है। जू में दर्शक इन्हें देखकर रोमांचित होते हैं।

ये भी हैं मामले

– 7 दिसंबर को नासिक के वाडी रैन इलाके में डेम्सी के बागान में गन्ना काटते समय तेंदुए के चार शावक दिखे

– मार्च 2018 में यूपी-उत्तराखंड बॉर्डर पर खटीमा क्षेत्र के गांव

हल्दी में किसान सरवन सिंह के खेत में तेंदुए के तीन शावक मिले

– दिसंबर 2019 में टांडा मल्लू के ग्राम मढ़ैया में गन्ने के खेत में तेंदुए के चार बच्चे मिले थे

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